शुक्रवार, 30 अप्रैल 2010

मैं खामोश रहा

जब नाजी कम्युनिस्टों के पीछे आए
मैं खामोश रहा
क्योंकि, मैं नाजी नहीं था
जब उन्होंने सोशल डेमोक्रेट्स को जेल में बंद किया
मैं खामोश रहा
क्योंकि, मैं सोशल डेमोक्रेट नहीं था
जब वे यूनियन के मजदूरों के पीछे आए
मैं बिल्कुल नहीं बोला
क्योंकि,मैं मजदूर यूनियन का सदस्य नहीं था
जब वे यहूदियों के पीछे आए
मै खामोश रहा
क्योंकि, मैं यहूदी नहीं था
लेकिन, जब वे मेरे पीछे आए
तब बोलने के लिए कोई बचा ही नहीं था
क्योंकि, मैं अकेला था
-पीटर मार्टिन जर्मन कवि

3 टिप्‍पणियां:

  1. महत्‍वपूर्ण और कालजयी कविता है यह।

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  2. देखें मैंने अपने ब्‍लाग गुल्‍लक utsahi.blogspot.com पर इसे बिनायक सेन की पोस्‍ट में उपयोग किया है।

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  3. जब नाजी कम्युनिस्टों के पीछे आए
    मैं खामोश रहा
    क्योंकि, मैं नाजी नहीं था
    कृपया उपरोक्‍त पैरा की तीसरी पंक्ति में यह परिवर्तन कर लें-

    जब नाजी कम्युनिस्टों के पीछे आए
    मैं खामोश रहा
    क्योंकि, मैं कम्युनिस्ट नहीं था

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